शिष्य बनने की योग्यताएँ
जैसे गुरु के गुण बताए जाते हैं, वैसे ही शिष्य की भी कुछ योग्यताएँ होती हैं।
एक सच्चे शिष्य के बिना गुरु का ज्ञान भी पूर्ण फल नहीं देता।
शिष्य बनने की योग्यताएँ :-
1. श्रद्धा (आस्था) – गुरु और उसके वचनों पर विश्वास हो।
2. विनम्रता – अहंकार छोड़कर विनयपूर्वक सीखने की भावना हो।
3. जिज्ञासा – सच्चा शिष्य ज्ञान पाने की प्रबल इच्छा रखता है।
4. अनुशासन – गुरु की मर्यादा, समय और नियमों का पालन करे।
5. धैर्य – ज्ञान और साधना में समय लगता है, जल्दी हार न माने।
6. सेवा भाव – गुरु और उसके मार्ग में निस्वार्थ सेवा करने की प्रवृत्ति।
7. समर्पण – अपने संदेह, आलस्य और स्वार्थ को त्यागकर पूरी निष्ठा से समर्पित होना।
8. कृतज्ञता – गुरु के उपदेश और कृपा के लिए सदैव आभार मानना।
9. सत्यनिष्ठा – शिष्य का हृदय निर्मल और सच्चा होना चाहिए।
10. अभ्यासशीलता – केवल सुनना नहीं, बल्कि जो सिखाया गया है उसे जीवन में उतारना।
संक्षेप में—
👉 शिष्य वही कहलाता है जो खाली पात्र की तरह हो, जिसे गुरु अपनी विद्या और अनुभव से भर सके।
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